| 🏷️ औषधियों के नाम | Triphala Churna, Hingwashtak Churna, Isabgol, Arogyavardhini Vati, Avipattikar Churna, Kumaryasava, Draksharishta |
|---|---|
| 💊 फॉर्म | चूर्ण, वटी, सिरप, अर्क |
| 🩺 उपयोग | कब्ज, अपच, गैस, एसिडिटी, मंदाग्नि, पाचन कमजोरी |
| 🏭 निर्माता | Patanjali, Baidyanath, Dabur, Zandu, Himalaya |
| 💰 कीमत | ₹60 – ₹250 (उत्पाद और ब्रांड पर निर्भर) |
| 📝 पर्ची की आवश्यकता | नहीं, OTC उपलब्ध लेकिन चिकित्सकीय सलाह आवश्यक |
| ⚠️ सावधानियां | गर्भवती, स्तनपान कराने वाली महिलाएं, या गंभीर रोगों वाले व्यक्ति डॉक्टर से परामर्श लें |
| 🚨 साइड इफेक्ट्स | अधिक मात्रा में सेवन से डायरिया, पेट दर्द या निर्जलीकरण हो सकता है |
| ❓ क्या लत लग सकती है? | नहीं, लेकिन लगातार और अनियंत्रित सेवन से शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है |
| 📂 श्रेणी | पाचन स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेदिक दवाएं |
परिचय
क्या आपके पेट की समस्या जैसे कि अपच, गैस, कब्ज़ या एसिडिटी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में तकलीफ देती हैं? क्या खाना ठीक से पचता नहीं, जिससे आपका मन और शरीर दोनों परेशान रहते हैं? बहुत से लोग पाचन तंत्र कमजोर होने की वजह से थकान, कमजोरी और अनियमितता महसूस करते हैं। ऐसे में पाचन तंत्र मजबूत करने के लिए सही दवा या उपाय बहुत जरूरी हो जाता है।
पाचन तंत्र मजबूत करने के लिए आयुर्वेदिक दवा उन लोगों के लिए एक प्राकृतिक और असरदार विकल्प हो सकती है, जो बिना साइड इफेक्ट के अपने पाचन को दुरुस्त करना चाहते हैं। ये दवाएं शरीर के हाजमे को सुधरने में मदद करती हैं, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं को कम करती हैं, और कब्ज जैसी तकलीफों को दूर करती हैं।
इस ब्लॉग में आप जानेंगे पाचन तंत्र मजबूत करने के लिए कौन-कौन सी आयुर्वेदिक दवाएं इस्तेमाल की जा सकती हैं, इनके फायदे क्या हैं, और इन्हें कैसे लेना चाहिए ताकि आपकी पाचन शक्ति बेहतर हो और आप स्वस्थ महसूस करें। साथ ही रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में इनके उपयोग से जुड़ी जरूरी बातें भी समझेंगे।
पाचन तंत्र मजबूत करने के लिए आयुर्वेदिक दवाएं
अगर आपका खाना सही से नहीं पचता, पेट भारी रहता है या बार-बार गैस, कब्ज़ और बदहजमी की शिकायत होती है, तो कुछ पारंपरिक आयुर्वेदिक दवाएं आपके पाचन तंत्र को फिर से दुरुस्त करने में मदद कर सकती हैं। ये दवाएं पेट की सफाई से लेकर आँतों की कार्यक्षमता तक पर असर डालती हैं, जिससे खाना ठीक से पचता है और शरीर को सही पोषण मिलता है।
1. त्रिफला चूर्ण
त्रिफला चूर्ण तीन फलों हरड़, बहेड़ा और आंवला से मिलकर बना होता है। यह पेट की सफाई करता है, आँतों को सक्रिय करता है और कब्ज को दूर करने में मदद करता है। रोज़ाना त्रिफला लेने से मल त्याग नियमित होता है, जिससे पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर हल्का महसूस करता है।
आधुनिक रिसर्च के अनुसार, त्रिफला में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो पेट के अंदर सूजन को कम करने और आँतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं।
सेवन विधि:
- रात को सोने से पहले आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें
- कब्ज़ अधिक हो तो मात्रा बढ़ाई जा सकती है, लेकिन चिकित्सक की सलाह से
- लंबे समय तक लेने से पेट साफ़ और पाचन शक्ति मज़बूत रहती है
2. हिंगवष्टक चूर्ण
हिंगवष्टक चूर्ण उन लोगों के लिए लाभकारी होता है जिनको बार-बार गैस, पेट फूलना और भारीपन महसूस होता है। इसमें हींग के अलावा कई गर्म प्रवृत्ति वाली जड़ी-बूटियाँ होती हैं जो अग्नि (जठराग्नि) को तेज़ करती हैं और गैस की दिक्कत को कम करती हैं।
आयुर्वेद में इसे भूख बढ़ाने वाला और खाना जल्दी पचाने वाला माना गया है। यह पेट में बनने वाली अतिरिक्त वायु को संतुलित करता है और पेट को हल्का महसूस कराता है।
सेवन विधि:
- खाने से पहले या बाद में आधा चम्मच चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें
- दिन में दो बार सेवन किया जा सकता है – सुबह और रात
- तेज गैस या अपच में तुरंत राहत मिलती है
3. इसबगोल
इसबगोल यानी भूसी फाइबर से भरपूर होता है जो आँतों की गति को बेहतर बनाता है। यह कब्ज के मरीजों के लिए रामबाण है और मल को नरम कर बाहर निकालने में मदद करता है। इससे मलत्याग आसान होता है और पेट साफ़ रहता है।
वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि इसबगोल में मौजूद घुलनशील फाइबर पाचन प्रक्रिया को सुधारता है, जिससे पेट में सूजन, जलन और गैस की समस्या में राहत मिलती है। इसका कोई नशा या आदत बनाने वाला प्रभाव नहीं होता।
सेवन विधि:
- रात को खाना खाने के 30 मिनट बाद एक चम्मच इसबगोल एक गिलास गुनगुने पानी या दूध में मिलाकर लें
- पानी की मात्रा अच्छी रखें ताकि सूखापन ना हो
- नियमित सेवन से कब्ज की समस्या खत्म होती है और पेट हल्का रहता है
4. आरोग्यवर्धिनी वटी
आरोग्यवर्धिनी वटी एक बहुपयोगी आयुर्वेदिक गोली है जो खासकर लिवर और पाचन तंत्र को ठीक रखने के लिए दी जाती है। यह जठराग्नि को मजबूत करती है, जिससे खाना बेहतर तरीके से पचता है और शरीर को सही पोषण मिलता है।
इसमें शुद्ध गंधक, लोह भस्म, अभ्रक भस्म जैसी खनिज जड़ी-बूटियां होती हैं जो लीवर को डिटॉक्स करती हैं और पाचन से जुड़ी गड़बड़ियों को धीरे-धीरे ठीक करती हैं। फैटी लीवर, पेट भारी रहना और भूख न लगने जैसे लक्षणों में असरदार मानी जाती है।
सेवन विधि:
- 1 गोली दिन में दो बार गुनगुने पानी के साथ लें
- भोजन के बाद सेवन करें
- लिवर संबंधी समस्याओं में डॉक्टर की सलाह लें
5. अविपत्तिकर चूर्ण
अविपत्तिकर चूर्ण उन लोगों के लिए है जिन्हें बार-बार पेट में जलन, खट्टी डकारें और एसिडिटी की शिकायत रहती है। यह पेट की गर्मी को संतुलित करता है और अम्लपित्त (Acidity) को कम करता है।
इसमें त्रिकटु, त्रिफला, शुंठी और एलायची जैसी ठंडी प्रकृति की जड़ी-बूटियाँ होती हैं जो पेट को ठंडक देती हैं और भूख को भी नियंत्रित करती हैं। वैज्ञानिक शोध भी इसी ओर इशारा करते हैं कि इसके नियमित उपयोग से पेट की जलन और गैस की समस्या में आराम मिलता है।
सेवन विधि:
- आधा चम्मच चूर्ण खाने से 30 मिनट पहले लें
- गुनगुने पानी या गुनगुने दूध के साथ लें
- तेज जलन या एसिडिटी हो तो दिन में दो बार लें
6. कुमार्यासव
कुमार्यासव एक तरल आयुर्वेदिक दवा है जो खासकर पाचन, लिवर और महिलाओं की पाचन संबंधी दिक्कतों में दी जाती है। इसमें एलोवेरा (घृतकुमारी) मुख्य घटक होता है जो पेट को ठंडक देता है, पाचन तंत्र की क्रिया सुधारता है और लीवर को भी दुरुस्त करता है।
आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे भूख बढ़ाने, पेट फूलने से राहत दिलाने और लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाने वाला कहा गया है। खासकर जब पाचन की कमजोरी हार्मोनल बदलावों या लिवर गड़बड़ी से जुड़ी हो।
सेवन विधि:
- 15 से 20 ml कुमार्यासव लें
- समान मात्रा में पानी मिलाकर लें
- खाने के बाद दिन में दो बार सेवन करें
7. द्राक्षारिष्ट
द्राक्षारिष्ट एक स्वादिष्ट आयुर्वेदिक सिरप है जो पाचन तंत्र की कमजोरी, कब्ज़, और भूख न लगने जैसी दिक्कतों में असर दिखाता है। इसमें मुख्य रूप से मुनक्का (किशमिश) होती है जो प्राकृतिक रूप से जठराग्नि को बढ़ाने में मदद करती है।
यह पेट में गैस बनने, हल्का भारीपन बने रहने और थकावट के साथ अपच होने जैसी स्थितियों में फायदेमंद माना गया है। यह शरीर को ताकत भी देता है और धीरे-धीरे पाचन की कार्यक्षमता बेहतर करता है।
सेवन विधि:
- 15 से 20 ml सिरप दिन में दो बार लें
- समान मात्रा में गुनगुना पानी मिलाकर लें
- भोजन के बाद सेवन करें
8. दशमूलारिष्ट
दशमूलारिष्ट एक क्लासिकल आयुर्वेदिक टॉनिक है जो खासकर महिलाओं में पाचन से जुड़ी कमजोरी, थकावट, गैस और अपच जैसी समस्याओं में दिया जाता है। यह ‘दशमूल’ यानी दस जड़ों से मिलकर बना होता है जो शरीर को संतुलित और मजबूत बनाता है।
यह सिरप पेट की ऐंठन, कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं में लाभदायक माना गया है। साथ ही यह शरीर की कमजोरी और पाचन से जुड़ी पुरानी थकान को दूर करने में भी मदद करता है।
सेवन विधि:
- 15 से 25 ml सिरप दिन में दो बार लें
- समान मात्रा में पानी मिलाकर लें
- भोजन के बाद या चिकित्सकीय सलाह अनुसार लें
9. अभयारिष्ट
अभयारिष्ट एक पारंपरिक आयुर्वेदिक सिरप है जो पेट साफ रखने, गैस कम करने और कब्ज को दूर करने में मदद करता है। इसका असर खासतौर पर उन लोगों में देखा जाता है जिन्हें रोज पेट ठीक से साफ नहीं होता या मल सख्त होता है।
इसमें हरड़ (अभया), सौंफ, सनाय आदि मिलाए जाते हैं जो आंतों की गति सुधारते हैं और पाचन को सहज बनाते हैं। ये पेट में भारीपन, गैस भराव और अपच की समस्या में राहत दे सकता है।
सेवन विधि:
- 15 से 25 ml दिन में एक या दो बार लें
- समान मात्रा में गुनगुना पानी मिलाकर लें
- रात में भोजन के बाद लेना अधिक फायदेमंद
10. त्रिकटु चूर्ण
त्रिकटु चूर्ण तीन तीखे घटकों से बनता है सोंठ, काली मिर्च और पिपली। ये सभी मिलकर जठराग्नि (पाचन अग्नि) को तेज करते हैं और आम जमा हुआ पाचन दोष दूर करने में मदद करते हैं।
जिन लोगों को बार-बार डकारें आती हैं, पेट में भारीपन रहता है, या खाना पचने में समय लगता है उनके लिए त्रिकटु उपयोगी हो सकता है। यह मेटाबोलिज़्म भी सुधारने में सहायक होता है।
सेवन विधि:
- 1 से 2 ग्राम चूर्ण दिन में दो बार लें
- गुनगुने पानी या शहद के साथ लें
- भोजन से पहले लेना अधिक लाभकारी
पाचन तंत्र कमजोर क्यों होता है?
कई लोग पेट की दवाएं तो लेते हैं, लेकिन असली वजह नहीं समझते कि पाचन तंत्र बार-बार क्यों बिगड़ता है। जब तक कारण साफ नहीं होगा, इलाज भी अधूरा ही रहेगा। नीचे वो आम आदतें हैं जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में पेट को कमजोर कर सकती हैं।
1. खाने का कोई तय समय न होना
अगर आप कभी 10 बजे नाश्ता करते हैं, कभी छोड़ देते हैं, या रात का खाना कभी 8 बजे तो कभी 11 बजे खाते हैं तो ये शरीर के पाचन सिस्टम को कंफ्यूज़ कर देता है। ठीक वैसे जैसे गाड़ी को कभी ठंडा इंजन चला दें, कभी गर्म, तो मशीन जल्दी खराब होती है।
2. तला-भुना और भारी खाना ज़्यादा खाना
समोसे, पकौड़े, नूडल्स या भारी मसालेदार खाना रोज़ खाने से पेट को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। एक-दो बार ठीक है, लेकिन अगर यही आदत बन जाए तो धीरे-धीरे पाचन तंत्र थकने लगता है।
3. तनाव और नींद की कमी
दिमाग और पेट का सीधा कनेक्शन होता है। जब मन परेशान रहता है या नींद पूरी नहीं होती, तो पाचन रस ठीक से नहीं बनते। ऐसा लगेगा जैसे पेट में हमेशा भारीपन या गैस बनी रहती है।
4. हर दो घंटे में चाय या कॉफी
कई लोग खाली पेट चाय पीते हैं, फिर दिनभर में 4-5 बार और पी लेते हैं। इससे पेट की एसिडिटी बिगड़ती है और भूख भी कम हो जाती है। पेट धीरे-धीरे सुस्त पड़ने लगता है।
5. बार-बार दवाओं का सेवन
पेनकिलर, एंटीबायोटिक या गैस की गोली बार-बार लेना शरीर के नैचुरल पाचन सिस्टम को धीमा कर सकता है। खासकर बिना डॉक्टरी सलाह के लगातार दवाएं लेना एक बड़ी वजह बन सकती है।
6. गलत तरीके से पानी पीना
खाना खाते ही एक-दो गिलास ठंडा पानी पी लेना या बिल्कुल कम पानी पीना, दोनों ही आदतें पाचन में रुकावट डालती हैं। सबसे बेहतर होता है भोजन करते वक़्त थोडा थोडा पानी पिने या भोजन करने के कुछ देर बाद पानी पीना।
7. शारीरिक गतिविधि की कमी
अगर दिनभर कुर्सी पर बैठना ही दिनचर्या बन गई है, तो खाना ठीक से हज़म नहीं होगा। थोड़ा टहलना, चलना या हल्की फिजिकल एक्टिविटी पेट को एक्टिव रखने में मदद करती है।
पाचन तंत्र मजबूत करने के घरेलू उपाय
घर में रखी छोटी-छोटी चीज़ें भी पाचन को दुरुस्त रखने में मदद कर सकती हैं। आपको बड़े खर्च या दवाओं की ज़रूरत नहीं, बस कुछ घरेलू नुस्खे और थोड़ी समझदारी। चलिए जानते हैं वो आसान उपाय जो रोज़ की ज़िंदगी में अपनाए जा सकते हैं।
1. सुबह गुनगुना पानी पीना
हर सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से पेट धीरे-धीरे एक्टिव होता है। ये पुराने जमा अपशिष्ट को बाहर निकालने में मदद करता है और मेटाबॉलिज्म भी तेज़ करता है। यह आदत पेट की सफाई और कब्ज से राहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है।
एक गिलास पानी हल्का गर्म करें। सुबह उठते ही खाली पेट धीरे-धीरे पीएं। चाहें तो उसमें नींबू का रस और थोड़ा शहद मिलाकर भी पी सकते हैं, लेकिन सिंपल गुनगुना पानी भी अकेले काफी है।
2. हींग का इस्तेमाल
हींग में ऐसे गुण होते हैं जो गैस, सूजन और पेट दर्द में राहत देते हैं। इसका असर तुरंत महसूस होता है, खासकर जब पेट फूला हुआ हो या भारीपन लगे।
एक चुटकी हींग को एक चम्मच गुनगुने पानी में मिलाकर पी लें। या फिर खाने में हल्का सा हींग तड़का लगाकर इस्तेमाल करें। बच्चों के पेट दर्द में भी यह तरीका असरदार होता है।
3. सौंफ और मिश्री खाना
खाना खाने के बाद सौंफ और मिश्री चबाने से न सिर्फ मुंह की ताजगी बनी रहती है, बल्कि यह पाचन रसों को भी एक्टिव करती है। ये एक बहुत पुराना और आजमाया हुआ घरेलू तरीका है।
बराबर मात्रा में सौंफ और मिश्री को मिलाकर एक डिब्बे में रखें। रोज़ खाने के बाद एक चम्मच चबाएं। चाहें तो इसमें थोड़ा सा सूखा नारियल भी मिला सकते हैं स्वाद और फायदे बढ़ाने के लिए।
4. छाछ या मट्ठा
भारी खाने के बाद छाछ पीने से पेट में ठंडक मिलती है और खाना जल्दी पचता है। यह पेट की गर्मी, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं में भी फायदेमंद होता है।
एक कटोरी दही में दो कटोरी पानी मिलाकर अच्छे से मथ लें। स्वाद के लिए थोड़ा भुना जीरा, काला नमक और पुदीना पाउडर मिला सकते हैं। इसे दोपहर के खाने के साथ या बाद में पीएं।
5. जीरा पानी
जीरा पेट के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। यह गैस, अपच और भारीपन में तुरंत आराम देता है। खासकर जब खाना हज़म न हो रहा हो या पेट में जलन हो।
एक चम्मच जीरा को एक गिलास पानी में उबालें। जब आधा रह जाए, छानकर हल्का गुनगुना पी लें। चाहें तो इसे रोज़ सुबह या खाने के बाद लिया जा सकता है।
6. हल्दी वाला दूध
हल्दी में सूजन कम करने और पाचन सुधारने वाले गुण होते हैं। रात में हल्दी वाला दूध लेने से नींद भी अच्छी आती है और अगली सुबह पेट हल्का लगता है।
एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर रात को सोने से पहले पीएं। ज़्यादा गाढ़ा या ज्यादा हल्दी न मिलाएं। यह शरीर को अंदर से साफ करने में मदद करता है।
पाचन तंत्र मजबूत करने के लिए क्या खाना चाहिए
अगर आपका खाना पेट में सही से पच नहीं रहा है, पेट भारी रहता है, गैस बनती है या खाना खाने के बाद सुस्ती छा जाती है, तो यह संकेत हैं कि पाचन तंत्र कमज़ोर हो चुका है। ऐसी स्थिति में सिर्फ दवा या घरेलू नुस्खे ही नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की डाइट में भी बदलाव ज़रूरी है। कुछ आसान और रोज़ खाए जाने वाले खाद्य पदार्थ पाचन को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
1. दही
दही एक प्राकृतिक प्रोबायोटिक है जो आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाता है और खाने को आसानी से पचाने में मदद करता है। रोज़ाना एक कटोरी दही खाने से पाचन तंत्र को ताकत मिलती है और पेट साफ़ भी रहने लगता है।
दही को दोपहर के खाने के साथ खाएं। कोशिश करें कि वह मीठी या मसालेदार ना हो। सादा और ताज़ा दही सबसे फायदेमंद होती है।
2. पका हुआ पपीता
पपीते में पपेन नाम का एंज़ाइम होता है जो भोजन को जल्दी पचाने में मदद करता है। यह कब्ज़, एसिडिटी और पेट की गड़बड़ियों को कम करता है। पके पपीते का सेवन खासतौर पर सुबह के समय फायदेमंद माना जाता है।
सुबह नाश्ते में एक छोटी कटोरी पपीता खाएं। बहुत ज़्यादा पका हुआ ना हो, न ही बिलकुल कच्चा। हफ्ते में 4–5 बार सेवन करें।
3. सादी खिचड़ी
खिचड़ी हल्का और जल्दी पचने वाला खाना है जो शरीर को आराम देता है और आंतों पर दबाव नहीं डालता। जब पेट भारी लगे या कुछ भारी खाना खाने का मन ना हो, तो खिचड़ी सबसे अच्छा विकल्प है।
मूंग दाल और चावल से बनी सादी खिचड़ी बनाएं। घी की कुछ बूंदें ऊपर से डालें। इसे दही या पकी लौकी के साथ खाएं। हफ्ते में 1–2 बार ज़रूर शामिल करें।
4. पालक और हरी सब्ज़ियाँ
हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ जैसे पालक, मेथी, बथुआ फाइबर से भरपूर होती हैं जो पेट की सफ़ाई में मदद करती हैं। ये आंतों की गति को बेहतर करती हैं और कब्ज़ से राहत देती हैं।
हफ्ते में कम से कम 3 बार हरी सब्ज़ियाँ पकी हुई रूप में शामिल करें। ज़्यादा मसाले, तेल या तली हुई न बनाएं। थोड़े घी और ज़ीरे से तड़का देना काफी होता है।
5. अजवाइन
अजवाइन में थाइमोल होता है जो गैस, अपच और पेट दर्द जैसी समस्याओं से राहत देता है। यह पाचन रसों को उत्तेजित करता है और भोजन को जल्दी पचने में मदद करता है।
खाने के बाद आधा चम्मच अजवाइन चबा लें या गुनगुने पानी में एक चुटकी नमक डालकर उबालकर अजवाइन पानी पीएं। दिन में एक बार पर्याप्त है।
❓ सामान्य प्रश्न
📰 पाचन तंत्र और आयुर्वेद से जुड़े हालिया शोध
इसबगोल का कब्ज, डायरिया और एसिडिटी में प्रभावी उपयोग
क्लिनिकल स्टडीज बताती हैं कि इसबगोल कब्ज के इलाज में बेहद असरदार है क्योंकि इसकी फाइबर सामग्री आंतों में जेल बनाकर मल त्याग को आसान बनाती है। इसे दही के साथ लेने पर यह डायरिया में भी राहत देता है और अत्यधिक एसिड को कम कर पेट की जलन और एसिडिटी में भी मदद करता है।
अविपत्तिकर चूर्ण से अम्लपित्त और अपच में सुधार
शोध के अनुसार अविपत्तिकर चूर्ण खट्टी डकार, सीने की जलन और भोजन के बाद भारीपन जैसे लक्षणों में स्पष्ट राहत देता है। यह अम्लपित्त (hyperacidity) के लक्षणों को नियंत्रित करने में आयुर्वेदिक रूप से असरदार माना गया है।
त्रिफला का पाचन सुधारने और आंतों की रक्षा में प्रभाव
मानव और पशु परीक्षणों से यह सिद्ध हुआ है कि त्रिफला कब्ज, पेट दर्द, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं में असरदार है। यह मल त्याग को नियमित करता है, आंतों की सुरक्षा करता है और आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देकर पाचन तंत्र को मजबूत करता है।
📚 संदर्भ
- आयुर्वेदिक औषधियों की पाचन स्वास्थ्य में भूमिका – इस अध्ययन में विभिन्न आयुर्वेदिक योगों जैसे त्रिफला, अविपत्तिकर चूर्ण और हिंग्वाष्टक चूर्ण के पाचन सुधारने में लाभ को दर्शाया गया है।
- पाचन में आयुर्वेदिक फॉर्मुलेशन की भूमिका – यह रिसर्च पेपर बताता है कि कैसे आयुर्वेदिक दवाएं अग्नि को संतुलित कर पाचन तंत्र को सक्रिय करती हैं और मलत्याग को सामान्य बनाती हैं।
- डायजेस्टिव हेल्थ के लिए त्रिफला का वैज्ञानिक मूल्यांकन – इस अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में त्रिफला के गैस्ट्रोप्रोटेक्टिव गुणों और आंतों में बैक्टीरिया बैलेंस को सुधारने की क्षमता को प्रमाणित किया गया है।